'विकास' की जमीन पर बहा आंसुओं का सैलाब, अंतिम यात्रा बनी पीड़ा का प्रतीक
झारखंड : झारखंड में विकास के तमाम दावों के बीच चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड स्थित कुब्बा गांव से एक शर्मनाक और दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं की हकीकत को उजागर करती है। सड़क न होने के कारण एक पिता को अपने बेटे के शव को कंधे पर ढोकर दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। घटना प्रतापपुर प्रखंड के आदिवासी बहुल कुब्बा गांव की है, जहां आदिम जनजातियों — बिरहोर, गंझू और भोक्ता — की आबादी रहती है। गांव तक सड़क नहीं पहुंची है और बारिश के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। शुक्रवार को इसी गांव में रहने वाले भोला गंझू के नाबालिग बेटे की मौत गांव के एक 'आहर' (तालाब) में डूबने से हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था, लेकिन गांव तक सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस वहां तक नहीं पहुंच सकी।
बेबस पिता भोला गंझू ने अपने बेटे के शव को कपड़े में लपेटा और कंधे पर उठाकर दो किलोमीटर दूर उस जगह तक पैदल चला, जहां एम्बुलेंस खड़ी थी। इस पूरे रास्ते में उसकी आंखों में दुख, बेबसी और व्यवस्था के प्रति गुस्सा साफ झलकता रहा। शव के साथ भटकते इस पिता की तस्वीरें न सिर्फ दिल को झकझोर देती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र की लापरवाही की पोल भी खोलती हैं। बताया जाता है कि प्रतापपुर क्षेत्र के कई गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बारिश के मौसम में इन गांवों तक पैदल पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। कुब्बा जैसे गांव, जो जंगल और पहाड़ियों के बीच बसे हैं, वहां कोई पक्की सड़क नहीं है।

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