राज्यों पर पड़ा जीएसटी का बोझ, केंद्र से मांगा राहत पैकेज
व्यापार: विपक्ष शासित राज्यों ने प्रस्तावित जीएसटी सुधार से होने वाले नुकसान के भरपाई के लिए पांच साल तक मुआवजे की मांग की है। इनका दावा है कि टैक्स का दो स्लैब करने से 1.5 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ तक के राजस्व का नुकसान हो सकता है। आठ राज्यों-हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री जीएसटी परिषद की बैठक में मांग रखेंगे।
सरकार ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में पांच और 18 फीसदी के अलावा कुछ सामानों पर 40 फीसदी टैक्स का प्रस्ताव दिया है। विपक्ष शासित राज्यों की मांग है, यह शुल्क राज्यों के बीच बांटा जाना चाहिए। कर्नाटक के वित्त मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने कहा, हर राज्य को मौजूदा जीएसटी राजस्व में 15 से 20% की कमी होने की उम्मीद है।
राज्यों का दावा, राजकोषीय ढांचे गंभीर रूप से होंगे अस्थिर
गौड़ा ने कहा, जीएसटी राजस्व में 20 प्रतिशत की कमी राज्य सरकारों के राजकोषीय ढांचे को गंभीर रूप से अस्थिर कर देगी। राज्यों को राजस्व स्थिर होने तक पांच साल तक मुआवजा मिलना चाहिए। जब जीएसटी लागू हुआ था, तब राजस्व-तटस्थ दर (आरएनआर) 14.4% थी। अब शुद्ध दर घटकर 11% हो गई। स्लैब में कटौती के वर्तमान प्रस्ताव से कराधान की शुद्ध दर घटकर 10% हो जाएगी।

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