मौसम में बदलाव का असर: उत्तर छत्तीसगढ़ में गिरा तापमान, ठंड ने दी दस्तक
रायपुर: दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के साथ ही अब उत्तर छत्तीसगढ़ में ठंड बढ़ने लगी है। सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के न्यूनतम तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। बीते 24 घंटों के भीतर न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस से घटकर करीब 15 डिग्री तक पहुंच गया है। ठंडी हवा सिहरन बढ़ा रही है।
इसके साथ ही प्रदेश भर में रात के तापमान में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले साल के मुकाबले इस साल के मुकाबले इस साल देशभर में सर्दी के समय से पहले दस्तक देने का असर छत्तीसगढ़ पर भी पड़ रहा है। प्रदेश में भी हल्की सर्दियों का दौर शुरू हो गया है।
दिवाली से पहले ही लोगों ने अपने गर्म कपड़े बाहर निकाल लिए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र अंबिकापुर के अनुसार, उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही ठंडी हवा के कारण छत्तीसगढ़ के उत्तरी हिस्सों विशेषकर सरगुजा, बलरामपुर, कोरिया और जशपुर जिलों के तापमान में गिरावट जारी रहेगी। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान में और गिरावट हो सकती है।
अंबिकापुर में 15.4 डिग्री तापमान
सरगुजा संभाग में अभी से रातें सर्द होने लगी है। अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 15.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पहाड़ी क्षेत्र पेंड्रारोड में पारा 18 डिग्री तक आ चुका है। यानी पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड ने अपना पैर पसारना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि गुरुवार की रात बिलासपुर में भी ठंडी हवाएं चलीं।
रायपुर में मौसम सामान्य रहेगा
राजधानी रायपुर का मौसम शनिवार को सामान्य बने रहने की संभावना है। दिन के समय तेज धूप होने के कारण हल्की गर्मी का अनुभव हो सकता है। इसके साथ ही शाम के समय हल्की ठंडी हवाएं चलने की संभावना है। धनतेरस पर बाजारों में रौनक रहेगी।
न्यायधानी में एक बार फिर मौसम बदलने की संभावना
बिलासपुर में दिवाली के बार एक बार फिर मौसम का तेवर बदल सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 21 से 24 अक्टूबर के बीच गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। यानी आसमान में बादल नजर आएंगे। फिलहाल रात में ठंडी हवा चलने लगी है। दिन और रात का तापमान सामान्य से कम है।
प्रवासी पक्षी एशियन बिल स्टार्क का प्रदेश में आगमन
ठंड की दस्तक के साथ ही श्रीलंका, इंडोनेशिया, म्यानमार सहित कई देशों से आने वाले पक्षी एशियन बिल स्टार्क का प्रवास काल कनकी में पूरा हो चुका है। अब वे अपने बच्चों के साथ मीलों का सफर पूरा कर स्वदेश लौटने लगे हैं। दशकों से यह खास किस्म के पक्षी जिले के ग्राम कनकी स्थित कनकेश्वर शिव मंदिर परिसर को अपने प्रवास का सबसे प्रिय स्थान बना लिया है। वे यहां प्रजनन के लिए आते हैं।

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