पंचायत चुनाव की तैयारी तेज, 13.66 लाख नए नाम शामिल
जयपुर|पंचायत राज संस्थाओं के आम चुनाव से पहले प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि सूची में कुल 4,02,20,734 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 2,08,62,380 पुरुष, 1,93,58,147 महिलाएं और 207 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।प्रारूप सूची जारी होने के बाद से अंतिम प्रकाशन तक 5,73,568 मतदाताओं की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो लगभग 1.45 प्रतिशत है। प्रतिशत वृद्धि के आधार पर बांसवाड़ा जिले में सर्वाधिक 4.55 प्रतिशत और फलोदी जिले में 4.46 प्रतिशत वृद्धि हुई। वहीं टोंक में सबसे कम 0.04 प्रतिशत और श्रीगंगानगर में 0.19 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशन 29 जनवरी 2026 को किया गया था। दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 25 फरवरी 2026 को अंतिम सूची जारी की गई। 1 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं करने वाले व्यक्तियों के नाम सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा 18(1) के अनुसार ग्राम पंचायत वार्ड, पंचायत समिति और जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्रों के लिए पृथक-पृथक मतदाता सूचियां तैयार की गई हैं।29 जनवरी को जारी प्रारूप सूची में कुल 3,96,47,166 मतदाता थे। इस अवधि में 13,66,435 नए मतदाता जोड़े गए तथा 7,92,867 नाम हटाए गए। इसके बाद अंतिम सूची में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 4,02,20,734 हो गई। अंतिम मतदाता सूचियां संबंधित अधिकारियों, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद कार्यालयों में निरीक्षण के लिए उपलब्ध हैं।कांग्रेस नेता डोटासरा ने लगाए आरोप कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि केंद्र की ओर से करीब 3000 करोड़ रुपये रोके जाने के बावजूद सरकार चुनाव प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा पा रही है। उनका आरोप है कि पंचायत चुनाव में संभावित हार के डर से सरकार घबराई हुई है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव होते ही सरकार का “सूपड़ा साफ” हो जाएगा। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर भी उन्होंने सरकार पर बहाना बनाने की तैयारी का आरोप लगाया और कहा कि सरकार अक्टूबर-नवंबर तक समय मांगने की भूमिका बना रही है।गृह राज्य मंत्री द्वारा एक पूर्व सांसद के कथित वीडियो को एआई जनरेटेड बताए जाने पर भी उन्होंने निशाना साधा। डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार अपराध के मुद्दों पर सदन में चर्चा से बच रही है। उनका कहना है कि पिछली बार भी गृह मामलों पर चर्चा नहीं कराई गई थी और इस बार भी टालमटोल जारी है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पर सदन में प्रभावी जवाब देने में असमर्थ रहने का आरोप लगाया।

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