जिले। में साइबर अपराध का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर शातिर ठगों ने 34 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर डॉक्टर को ह्यूमन ट्रैपिकिंग और महिलाओं के साथ अश्लीलता जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी। वीडियो कॉल पर नकली गिरफ्तारी का नाटक रचकर डॉक्टर को इतना डरा दिया गया कि उन्होंने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर एक ही दिन में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी। ठगी के लिए आरोपियों ने बेहद सुनियोजित तरीका अपनाया। आरएन रिक्वायरमेंट नाम की फर्जी फर्म के जरिए बैंक खाता खुलवाया गया और उसी खाते में पूरी रकम मंगवाई गई। रकम ट्रांसफर होते ही आरोपी फरार हो गए। मामले की शिकायत मिलते ही नागौर साइबर थाना सक्रिय हुआ। उपअधीक्षक धर्म पूनिया के नेतृत्व में टीम गठित कर दिल्ली के बृजपुरी, करावल नगर और दयालपुर क्षेत्रों में लगातार 15 दिन तक रैकी और निगरानी की गई। तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर आखिरकार चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों में इमरान, विवेक कुमार, सलमान और योगेन्द्र शामिल हैं, जो दिल्ली के विभिन्न इलाकों के निवासी हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि ये लोग बैंक खाते खुलवाकर साइबर गैंग को उपलब्ध करवाते थे और कमीशन के बदले खातों का दुरुपयोग करवाते थे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5.54 लाख रुपये की राशि होल्ड करवा दी है, जबकि शेष रकम की रिकवरी के प्रयास जारी हैं। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिला पुलिस अधीक्षक रोशनलाल मीणा ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अज्ञात कॉल या डिजिटल अरेस्ट जैसी धमकी से घबराएं नहीं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। यह कार्रवाई साइबर ठगों के खिलाफ एक बड़ा संदेश मानी जा रही है।