लोकसभा परिसीमन को लेकर हलचल, नए सीट फॉर्मूले पर केंद्र की नजर
नई दिल्ली: देश की चुनावी व्यवस्था और संसद के ढांचे में आजादी के बाद का सबसे बड़ा बदलाव करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़े फॉर्मूले पर काम कर रही है। सरकार लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने की तैयारी में है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य साल 2029 के आगामी आम चुनावों से ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को पूरी तरह से लागू करना है। इस नए मसौदे के जरिए सरकार दक्षिण भारतीय राज्यों की उन राजनीतिक चिंताओं को भी दूर करने का प्रयास कर रही है, जिसमें उन्हें आबादी के आधार पर सीटें कम होने का डर सता रहा था।
क्या है लोकसभा सीटों को बढ़ाने का नया फॉर्मूला?
सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे नए फॉर्मूले के तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या को करीब 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। खास बात यह है कि सीटों की संख्या बढ़ाते समय राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को 1971 की जनगणना के आधार पर ही बनाए रखने का प्रस्ताव है। इसका सीधा मतलब यह है कि सीटें बढ़ने के बावजूद संसद में किसी भी राज्य की आनुपातिक राजनीतिक ताकत कम नहीं होगी, जिससे दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताएं खत्म हो सकेंगी। सीटों का यह नया पुनर्निर्धारण (परिसीमन) 2011 की जनगणना के प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा, क्योंकि कोरोना काल और अन्य वजहों से नई जनगणना के आंकड़े आने में अभी समय है।
2029 से महिला आरक्षण लागू करने की राह में अड़चनें
साल 2023 में बने मूल महिला आरक्षण कानून के अनुसार, यह व्यवस्था साल 2034 से पहले लागू नहीं हो सकती थी, क्योंकि इसे अगली नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था। मोदी सरकार इसे हर हाल में 2029 के लोकसभा चुनाव से ही जमीन पर उतारना चाहती है और इसी के लिए संविधान संशोधन विधेयक का नया मसौदा तैयार किया गया है। इससे पहले अप्रैल के महीने में इस संबंध में लाया गया एक विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका था, क्योंकि सरकार उसे पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाई थी।
संसद में दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े का इंतजार
रणनीतिक तौर पर सरकार अब पूरी तरह फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सूत्रों का कहना है कि नए संविधान संशोधन विधेयक को संसद में तभी पेश किया जाएगा, जब सरकार को दोनों सदनों में संख्याबल का पूरा भरोसा हो जाएगा। वर्तमान में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास लोकसभा में करीब 300 सांसद हैं, जबकि तीन सीटें खाली हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण कानून को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत यानी कम से कम 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। नए विधेयक के पास होने के बाद देश में कुल 850 लोकसभा सीटें हो जाएंगी, जिनमें से 815 राज्यों से और 35 केंद्र शासित प्रदेशों से चुनी जाएंगी और इनमें से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।

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