राम मंदिर कथित चंदा चोरी मामला: जांच में सामने आए सनसनीखेज दावे, चार्टर्ड प्लेन से ट्रेन तक जुड़ा नेटवर्क
नई दिल्ली। अयोध्या के श्री राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी से उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग और तीखी हो गई है। इस मामले में रोज नए-नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में एक खोजी टेलीविजन चैनल के नए स्टिंग ऑपरेशन 'ऑपरेशन चंदा चोरी' ने इस पूरे मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ ला दिया है, जिससे इस कथित घोटाले की परतें और गहरी होती नजर आ रही हैं।
स्टिंग ऑपरेशन में सिंडिकेट का भंडाफोड़ और साजिश
एक विशेष खोजी रिपोर्ट के तीन हिस्सों में किए गए खुलासे में यह दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त राम मंदिर ट्रस्ट के एक महंत के बेहद करीबी सहयोगी (व्हिसलब्लोअर) ने कैमरे पर इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस सिंडिकेट के मुख्य सूत्रधार ने न केवल मंदिर परिसर के भीतर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों को इस हेराफेरी के तौर-तरीके सिखाए, बल्कि इस काम को बिना किसी डर के अंजाम देने के लिए अपने सगे-संबंधियों सहित करीब 200 बाहरी लोगों की एक बड़ी टीम को इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा बना लिया था।
सोने-चांदी की हेराफेरी और परिवहन का शातिर तरीका
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में श्रद्धापूर्वक अर्पित किए गए सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं को एक सोची-समझी साजिश के तहत गायब किया जा रहा था। इन कीमती धातुओं को पिघलाने और साफ करने के नाम पर स्थानीय सर्राफा व्यापारियों के पास भेजने के बजाय, बोरियों में बंद करके ट्रेनों के माध्यम से सीधे कर्नाटक भेजा जाता था। कानूनी कार्रवाई या चेकिंग से बचने के लिए परिवहन के सरकारी वाउचर और दस्तावेजों में चालाकी से वजन कम दिखाया जाता था; उदाहरण के लिए यदि 26 किलोग्राम सोना ले जाया जा रहा था, तो वाउचर केवल 25 किलोग्राम का ही बनता था, ताकि जांच होने पर दस्तावेज दिखाए जा सकें और सुरक्षित निकलने पर बचा हुआ 1 किलोग्राम सोना सीधे आरोपियों की जेब में चला जाए।
चार्टर्ड प्लेन से सफर और सर्दियों की राहत सामग्री में लूट
यह पूरा फर्जीवाड़ा मंदिर में चढ़ावा आने और दान सामग्री के वितरण के दौरान लगातार जारी रहा। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां मंदिर की कीमती संपत्तियों को गुपचुप तरीके से रेलगाड़ियों से भेजा जाता था, वहीं इस गिरोह के मुख्य सरगना खुद चार्टर्ड उड़ानों (विशेष विमानों) से आलीशान सफर करते थे। इस सिंडिकेट ने राम मंदिर ट्रस्ट के मुख्य पदाधिकारियों को पूरी तरह से गुमराह और अंधेरे में रखा ताकि उन्हें इसकी भनक न लग सके। कीमती धातुओं के अलावा इस गिरोह ने मुंबई के एक दानदाता द्वारा मंदिर के निर्धन कर्मचारियों के लिए भेजी गई सर्दियों की जैकेटों से भरे दो ट्रकों पर भी हाथ साफ कर दिया; कर्मचारियों तक महज 40 जैकेटें पहुंचाई गईं और बाकी की पूरी खेप को एक रसूखदार सदस्य के निजी आवास पर भेजकर खुले बाजार में अवैध रूप से बेच दिया गया।

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