जमीन विवाद ने बढ़ाया तनाव, कब्जा दिलाने पहुंची टीम को खदेड़ा गया
जगदलपुर। बस्तर संभाग के जगदलपुर जिले अंतर्गत आने वाले करपावंड क्षेत्र में शुक्रवार को उस समय भारी बवाल और हिंसक झड़प हो गई, जब प्रशासनिक टीम अदालत के आदेश पर एक विवादित भूमि का सीमांकन (नापजोख) करने और वास्तविक मालिक को कब्जा दिलाने पहुंची थी। न्यायालय के डिक्री आदेश का पालन कराने मौके पर पहुंचे राजस्व अमले के सामने स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उग्र भीड़ ने जमीन के नए खरीदार शेराराम चौधरी और भूमि विक्रेता मदन निषाद को घेरकर उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान बीच-बचाव करने उतरे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी तीखी धक्का-मुक्की हुई और भीड़ ने राजस्व निरीक्षक (RI) देवेंद्र श्रीवास की जमकर पिटाई कर दी। इस अप्रत्याशित हिंसक घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसे देखते हुए गांव को छावनी में तब्दील कर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
क्या है 10 एकड़ भूमि का कानूनी विवाद?
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, क्रेता शेराराम चौधरी ने करपावंड इलाके में मदन निषाद नामक व्यक्ति से लगभग 10 एकड़ और 10 डिसमिल कृषि भूमि का सौदा किया था। इस बेशकीमती जमीन के एक बड़े हिस्से पर कुछ स्थानीय रसूखदारों और ग्रामीणों द्वारा कथित तौर पर अवैध कब्जा जमाया गया था, जिसके निवारण के लिए यह कानूनी लड़ाई अदालत पहुंची थी। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय का अंतिम फैसला शेराराम के पक्ष में आया। कोर्ट के इसी आधिकारिक आदेश के तहत शुक्रवार को राजस्व विभाग की एक संयुक्त टीम मौके पर सीमांकन की कागजी कार्रवाई पूरी करने पहुंची थी। एहतियात के तौर पर सुबह से ही दो गाड़ियों में पुलिस के जवान भी मुस्तैद किए गए थे, लेकिन नापजोख की प्रक्रिया खत्म होते ही अचानक विवाद गहरा गया।
प्रशासनिक पक्ष: अदालत के आदेश और नक्शे के तहत हो रही थी वैधानिक कार्रवाई
घटना स्थल पर मौजूद तहसीलदार रूपेश मरकाम और पीड़ित भू-स्वामी शेराराम चौधरी का साफ कहना है कि पूरी कार्रवाई पूरी तरह से पारदर्शी और न्यायसंगत थी। अधिकारियों के मुताबिक:
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रिकॉर्ड की सत्यता: सीमांकन की यह कार्रवाई राजस्व विभाग के वर्तमान आधिकारिक रिकॉर्ड और डिजिटल सरकारी नक्शे के आधार पर ही की जा रही थी, जिसमें किसी भी प्रकार की कोई विसंगति या त्रुटि नहीं थी।
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भीड़ को उकसाने का आरोप: तहसीलदार ने अपने बयान में बताया कि शुरुआत में पूरी प्रक्रिया अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से चल रही थी। परंतु, जैसे ही टीम ने खूंटियां गाड़ना शुरू किया, वैसे ही स्थानीय सरपंच और उसके कुछ खास करीबियों ने सोची-समझी साजिश के तहत ग्रामीणों की भीड़ को भड़काया और उन पर जानलेवा हमला करवा दिया। प्रशासन का तर्क है कि यदि किसी भी पक्ष को सरकारी नक्शे से कोई शिकायत थी, तो वे उच्च न्यायालय या ऊपरी राजस्व अदालत में अपील कर सकते थे, लेकिन कानून अपने हाथ में लेकर शासकीय सेवकों पर हमला करना अक्षम्य अपराध है।
ग्रामीणों का पक्ष: सरकारी नक्शा पूरी तरह गलत, सड़क किनारे की जमीन हथियाने की साजिश
दूसरी ओर, स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम पंचायत सरपंच का सीधा आरोप है कि प्रशासन जिस नक्शे को आधार बनाकर सीमांकन कर रहा था, वह जमीनी हकीकत और राजस्व के पुराने दस्तावेजों से मेल नहीं खाता। ग्रामीणों का तर्क है:
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लोकेशन में हेरफेर: वर्तमान विवादित नक्शे में इस जमीन को मुख्य मार्ग (सड़क) से सटा हुआ दर्शाया जा रहा है, जबकि विक्रेता मदन निषाद की वास्तविक पैतृक जमीन गांव के आंतरिक हिस्से में काफी पीछे की तरफ स्थित है।
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प्रशासनिक जल्दबाजी: ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासन को कोर्ट के आदेश का हवाला देकर जल्दबाजी में कब्जा दिलाने के बजाय, पहले राजस्व रिकॉर्ड और नक्शे की इस गंभीर तकनीकी त्रुटि में सुधार करना चाहिए था। इसी प्रशासनिक अनदेखी और पक्षपात के आरोपों के कारण ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
दोषियों की पहचान तेज, संगीन धाराओं में दर्ज होगी एफआईआर
इस हिंसक झड़प में गंभीर रूप से घायल हुए जमीन मालिक शेराराम, विक्रेता मदन निषाद और आरआई देवेंद्र श्रीवास को प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। शासकीय कार्य में बाधा डालने, लोक सेवक पर हमला करने और दंगा भड़काने के इस गंभीर मामले को लेकर जिला प्रशासन बेहद सख्त रुख अख्तियार कर रहा है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर घटना स्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर हमलावरों और उपद्रवियों को चिन्हित (आइडेंटिफाई) किया जा रहा है। पुलिस विभाग का कहना है कि सरपंच सहित भीड़ को उकसाने वाले सभी मुख्य दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।

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