जोधपुर में चिकित्सा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल Jodhpur
जोधपुर। पावटा जिला अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद कुछ प्रसूताओं के स्वास्थ्य में आई गिरावट के मामले को राज्य सरकार बेहद गंभीरता से ले रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आदेश के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ सोमवार देर रात खुद ग्राउंड जीरो पर स्थिति संभालने जोधपुर पहुंचीं।
एम्स में भर्ती प्रसूताओं के इलाज की समीक्षा
जोधपुर पहुंचते ही प्रमुख शासन सचिव सबसे पहले एम्स अस्पताल गईं। वहाँ उन्होंने उपचाराधीन दोनों महिलाओं की सेहत की जानकारी ली। राठौड़ ने डॉक्टरों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक कर इलाज की बारीकियों, मेडिकल मैनेजमेंट और उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की। उन्होंने डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रसूताओं को ठीक करने के लिए बेहतरीन से बेहतरीन इलाज मुहैया कराया जाए।
पावटा अस्पताल का औचक निरीक्षण और डॉक्टरों को सख्त निर्देश
इसके बाद प्रमुख शासन सचिव सीधे पावटा जिला अस्पताल पहुंचीं। यहाँ उन्होंने वार्डों में जाकर भर्ती छह प्रसूताओं से मुलाकात की और उनकी सेहत का हाल जाना। उन्होंने मरीजों की केस फाइल्स, मेडिकल रिपोर्ट्स और चल रहे ट्रीटमेंट प्लान को बारीकी से देखा।
अस्पताल प्रबंधन को कड़े निर्देश देते हुए उन्होंने कहा:
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सभी मरीजों की 24 घंटे निगरानी (Round-the-clock monitoring) की जाए।
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उनकी सेहत में होने वाले छोटे से छोटे बदलाव पर भी डॉक्टर नजर रखें।
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इलाज की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर रत्ती भर भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
परिजनों को दिया संवेदनशीलता का भरोसा
निरीक्षण के दौरान गायत्री राठौड़ ने पीड़ित परिवारों से भी बातचीत की। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर पूरी संवेदनशीलता के साथ नजर रख रही है। मरीजों के उपचार में संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी और सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।
वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक
इस औचक निरीक्षण के दौरान जोधपुर जिला कलेक्टर आलोक रंजन, डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. बी.एस. जोधा सहित स्वास्थ्य विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि इस संबंध में एक विस्तृत समीक्षा बैठक भी की जा रही है, ताकि इलाज की प्रगति, जांच रिपोर्टों और व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा कर आगे के कदम उठाए जा सकें। उन्होंने दोहराया कि प्रसूताओं की सुरक्षा और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य लाभ देना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है।

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