झारखंड में इस पूर्व सांसद ने छोड़ दिया RJD का साथ, बसपा में हुए शामिल....
मेदिनीनगर (पलामू)। पलामू के पूर्व सांसद कामेश्वर बैठा ने टिकट नहीं मिलने पर राष्ट्रीय जनता दल से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। अब वह बसपा के टिकट पर पलामू सुरक्षित लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।
वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में कामेश्वर बैठा ने झामुमो के टिकट पर पलामू सुरक्षित लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उस समय उन्होंने राजद प्रत्याशी घूरन राम को 23,338 मतों से हराया था। उस चुनाव में कामेश्वर बैठा को 1,67,995 मत मिले थे, जबकि राजद प्रत्याशी घूरन राम को 1,44,457 मत मिले।
इस बार राजद ने नहीं दिया टिकट
उसके बाद साल 2014 में हुए चुनाव में कामेश्वर बैठा ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हालांकि उस चुनाव में महज 37,043 मत लाकर चौथे स्थान पर रहे थे। वर्ष 2019 का चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा। उसके बाद वह राजद में शामिल हो गए थे, लेकिन इस बार उनको राजद ने टिकट नहीं दिया।
इसके पहले उन्होंने वर्ष 2007 में बसपा के टिकट पर पलामू सुरक्षित लोकसभा सीट से उप चुनाव लड़ा था। इसमें वह 22,327 मतों से राजद प्रत्याशी घूरन राम से हार गए थे। उस चुनाव में राजद प्रत्याशी घूरन राम को 1,64,202 मत मिले थे। वहीं, 1,41,875 मत प्राप्तकर कामेश्वर बैठा दूसरे स्थान पर रहे थे।
जेल से ही कामेश्वर बैठा ने दाखिल किया था नामांकन
पूर्व माओवादी नेता कामेश्वर बैठा ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर पलामू सुरक्षित लोकसभा सीट से नामांकन किया था। इसके बाद जेल से ही चुनाव जीत गए। सांसद बनने के साढ़े तीन साल बाद वे जेल से बाहर निकले थे।
उनके चुनाव में विजयी होने पर कई माओवादी विचारधारा के लोगों ने सक्रिय राजनीति में आकर वर्ष 2009 व 2014 के विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाई। इसमें सतीश कुमार, युगल पाल, दिनकर यादव, विनोद शर्मा आदि शामिल थे। हालांकि इस में कोई सफलता नहीं हुए।

बागेश्वर धाम में सजा विवाह मंडप, धीरेंद्र शास्त्री ने मोहन यादव को लगाई परंपरा की हल्दी
चाकसू में NH-52 पर भीषण हादसा: ट्रेलर में घुसी कार, एमपी के 5 श्रद्धालुओं की मौत
नरेंद्र मोदी ने पुलवामा शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बोले– उनका साहस हर भारतीय को करता है प्रेरित
छत्तीसगढ़ के राशन कार्डधारकों के लिए खुशखबरी… इस दिन से मिलेगा एक साथ 2 महीने का चावल
वनांचल में पक्के घरों की क्रांति: छिंदवाड़ा बना केंद्र सरकार का मॉडल जिला